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जरूरत की खबर- घरेलू कामों से घटती बीमारियों का रिस्क:झाडू–पोंछा भी फायदेमंद, डेली लाइफ में फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने के 14 टिप्स

19 February 2026
जरूरत की खबर- घरेलू कामों से घटती बीमारियों का रिस्क:झाडू–पोंछा भी फायदेमंद, डेली लाइफ में फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने के 14 टिप्स
बचपन में जब मां या दादी कहती थीं “घर के काम किया करो, सेहत अपने-आप ठीक रहेगी,” तो वह बात उस समय सिर्फ नसीहत लगती थी। समय बदला तो फिटनेस की परिभाषा भी बदल गई। अब जिम और हार्ड वर्कआउट को ही फिटनेस का असली पैमाना मान लिया गया है। इस बदलाव में घर के रोजमर्रा के कामों की अहमियत पीछे छूट गई। लेकिन क्या आपको पता है कि घर के काम भी दरअसल एक तरह की एक्सरसाइज ही हैं। इतना ही नहीं, कुछ मेटाबॉलिक बीमारियों की स्थिति में घर के काम मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम कर सकते हैं। है न मजे की बात। जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में पब्लिश हालिया स्टडी के मुताबिक, लाइट फिजिकल एक्टिविटी जैसे घर के काम, दिनभर थोड़ा-बहुत मूवमेंट करते रहने से मौत का जोखिम कम हो सकता है। स्टडी में शामिल जो लोग कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम की एडवांस स्टेज से पीड़ित थे, उनमें इसका असर ज्यादा देखा गया। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि घरेलू काम करना कितना फायदेमंद है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- क्या घर के कामों को लाइट फिजिकल एक्टिविटी माना जा सकता है? इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं? जवाब- हां, ये सब लाइट फिजिकल एक्टिविटीज ही हैं क्योंकि इनमें बॉडी मूवमेंट की जरूरत होती है। घरेलू काम करते रहने से हार्ट रेट नॉर्मल रहती है। अगर रेगुलर ये काम करते हैं तो कैलोरी बर्न होती है। लाइट फिजिकल एक्टिविटी जॉइंट मूवमेंट और मसल एक्टिवेशन में भी मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं कि इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं- सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच संबंध को लेकर नई रिसर्च क्या कहती है? जवाब- हाल ही में जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसमें पता चला कि जिन लोगों को कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम है, अगर वे घर पर सिर्फ हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करें या सिर्फ चलें-फिरें, घर के रेगुलर काम करें तो उनमें मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम हो जाता है। कुल-मिलाकर रिसर्च में साफ हुआ है कि स्वस्थ रहने के लिए रोज जिम जाकर हैवी वर्कआउट करना जरूरी नहीं है। इसके लिए घर की क्लीनिंग और डस्टिंग करना भी काफी है। यह सब करते हुए भी हमारी एक्सरसाइज हो जाती है। सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी दिल और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में कैसे मदद करती है? जवाब- हल्की लेकिन नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर को कई स्तरों पर फायदा पहुंचाती है। इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों के लिए लाइट फिजिकल एक्टिविटी क्यों खास तौर पर फायदेमंद मानी जाती है? लाइट फिजिकल एक्टिविटी मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे एक्टिव करती है। इससे बॉडी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। इससे ग्लूकोज बर्न होता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम के अलावा लाइट फिजिकल एक्टिविटी और किन बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज जितनी असरदार होती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज की जगह नहीं ले सकती, लेकिन सेहत के लिहाज से इसे कम असरदार भी नहीं माना जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। फिजिकल एक्टिविटी उसे एक्टिव रखने में मदद करती है। जिम या हैवी वर्कआउट से फिटनेस और मसल स्ट्रेंथ बढ़ती है, लेकिन लाइट फिजिकल एक्टिविटी रोजाना मूवमेंट बनाए रखकर हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करती है। इसलिए दोनों की भूमिका अलग है। सवाल- लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए बीच-बीच में हल्का मूवमेंट क्यों जरूरी माना जाता है? जवाब- लगातार बैठे रहने से मांसपेशियों की एक्टिविटी कम हो जाती है। ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त होने लगता है। उठकर थोड़ा चलना, स्ट्रेच करना या पोजिशन बदलना मसल्स को दोबारा एक्टिव करता है, जिससे ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर होता है और ब्लड फ्लो सुधरता है। साथ ही यह पीठ, गर्दन और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। सवाल- रोजमर्रा की जिंदगी में लाइट फिजिकल एक्टिविटी को कैसे बढ़ा सकते हैं? जवाब- फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने के लिए जिम या हार्ड एक्सरसाइज ही जरूरी नहीं होती। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी शरीर को एक्टिव रखा जा सकता है। ग्राफिक से समझते हैं- दिनभर के छोटे-छोटे मूवमेंट को नजरअंदाज न करें। थोड़ी देर चलना या उठकर खड़े होना भी मायने रखता है। आखिरकार, सेहत सिर्फ एक घंटे की एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि पूरे दिन की एक्टिव लाइफस्टाइल से बनती है। …………………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये एक्सरसाइज:एक जगह बैठे रहना 10 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक, बॉडी मूवमेंट है जरूरी मेहनत करना किसे पसंद है। एक जगह पसरकर बैठे रहो। आराम से काम करना आमतौर पर हर किसी को पसंद आता है। खासकर जब आराम से कुर्सी पर बैठकर AC की हवा ले रहे हों। सही मायने में यही ‘व्हाइट कॉलर’ जॉब है क्योंकि इसमें फिजिकल वर्क की जगह AC में कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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