इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच शुरू करने का आदेश दिया।
21 फरवरी 2026 को प्रयागराज की POCSO स्पेशल कोर्ट (ADJ रेप एंड POCSO एक्ट, जज विनोद कुमार चौरसिया) ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश नाबालिग बच्चों के यौन शोषण (POCSO एक्ट के तहत) के गंभीर आरोपों पर आधारित है।
मुख्य बिंदु:
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने कोर्ट में दो नाबालिग बच्चों को पेश किया था, जिन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोप लगाए।
13 फरवरी 2026 को कोर्ट ने इन बच्चों के बयान (वीडियो रिकॉर्डेड) दर्ज किए थे।
प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी।
कोर्ट ने झूंसी थाने में FIR दर्ज करने और POCSO एक्ट के प्रावधानों के अनुसार निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं शीघ्र जांच करने का निर्देश दिया है।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट (अब प्रयागराज हाईकोर्ट) से जुड़ा नहीं दिखता; बल्कि यह प्रयागराज की POCSO स्पेशल कोर्ट का फैसला है। (आपके संदेश में "इलाहाबाद हाईकोर्ट" का जिक्र है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट्स में यह POCSO कोर्ट का आदेश है।)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया:
स्वामी जी ने आरोपों को फर्जी और झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने से सच्चाई सामने आएगी, और जांच से फर्जीवाड़ा साबित होगा। वे दावा करते हैं कि यह उनके गौ माता के लिए आवाज उठाने के कारण दबाने की कोशिश है, और शिकायतकर्ता पर पहले से आपराधिक रिकॉर्ड होने का भी जिक्र किया।
यह एक संवेदनशील और गंभीर मामला है, जिसमें जांच अभी शुरू होने वाली है। आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच पर निर्भर करेगी।
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