बेटे ने बनाया नसीमुद्दीन के सपा में जाने का रास्ता:अखिलेश के कॉमन फ्रेंड ने निभाई अहम भूमिका, इनसाइड स्टोरी
2026-02-16 00:18:33 | 0 Views
कांग्रेस के नेता और कभी बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने रविवार को सपा का दामन थाम लिया। 2017 से पहले एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे नसीमुद्दीन ने जब लाल टोपी लगाई, तो सबसे बड़ा सवाल यही था कि उनके सपा में जॉइन करने की इनसाइड स्टोरी क्या है? आखिर ये अचंभा हुआ कैसे? क्या दोनों नेताओं की सीधे बात हुई या फिर किसी ने मध्यस्थता की? मध्यस्थता की, तो बात कहां से शुरू हुई? बात परवान कहां चढ़ी? इससे सपा को क्या फायदा और क्या नुकसान हो सकता है? नसीमुद्दीन को क्या फायदा हो सकता है? इन सब सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश दैनिक भास्कर ने की। पढ़िए ये खास खबर… नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल के एक करीबी दोस्त ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बात की। वह कहते हैं- 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा की कामयाबी के बाद से ही नसीमुद्दीन का रुख पार्टी में शामिल होने का हो गया था। इसमें अहम भूमिका निभाई अखिलेश यादव और नसीमुद्दीन के बेटे अफजल के कॉमन फ्रेंड कारोबारी रेहान ने। अखिलेश के स्कूल टाइम दोस्त हैं रेहान
रेहान अखिलेश के उस समय के दोस्त हैं, जब वे मैसूर में पढ़ाई कर रहे थे। अखिलेश यादव मैसूर से ऑस्ट्रेलिया गए और वहां से लखनऊ लौटे। लेकिन, उनकी रेहान से दोस्ती न सिर्फ बनी रही, बल्कि और मजबूत होती रही। रेहान मुंबई में बस गए। यहीं उनकी मुलाकात नसीमुद्दीन के बेटे अफजल से हुई। इन दोनों की दोस्ती भी खूब परवान चढ़ी। बताते हैं, अफजल ने रेहान से सपा मुखिया अखिलेश यादव की तारीफ की। रेहान ने भी अखिलेश को विजनरी नेता और लंबी रेस का घोड़ा बताया। साथ ही बातों-बातों में कह भी दिया कि ‘पापा से पूछो अगर कहें, तो मैं आगे बात करूं।’ फिर यहीं से बात की शुरुआत हो गई। अफजल के साथ अखिलेश से मिले नसीमुद्दीन
करीब 6 महीने पहले पहले अफजल और अखिलेश यादव की मुलाकात हुई। इसके बाद दिल्ली में नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अफजल और अखिलेश की मुलाकात हुई। फिर दोनों नेताओं की लगातार बातचीत होने लगी। तय हो गया कि 2026 के शुरुआत में वे सपा जॉइन करेंगे। 15 फरवरी को वो दिन भी आ गया, जब नसीमुद्दीन ने सार्वजनिक तौर पर सपा जॉइन कर ली। ये तो रही नसीमुद्दीन के सपा में आने की इनसाइड स्टोरी। अब बड़ा सवाल कि धीरे-धीरे बसपाई सपा में क्यों जा रहे? नसीमुद्दीन का भविष्य क्या है? धीरे-धीरे कई बसपाई हो गए सपाई
दरअसल, 2019 में सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद लोकसभा चुनाव में हार मिली। इसके बाद जब बसपा ने गठबंधन तोड़ने का एकतरफा फैसला किया, तो इसका सबसे ज्यादा रंज अखिलेश यादव को ही हुआ। इसी के बाद से समाजवादी पार्टी ने ऑपरेशन बसपा शुरू किया। धीरे-धीरे बसपा के बड़े नेता समाजवादी पार्टी में शामिल होने लगे। इनमें लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, इंद्रजीत सरोज, स्वामी प्रसाद मौर्य, बाबू सिंह कुशवाहा, राम शिरोमणि वर्मा, आरके चौधरी, राम प्रसाद चौधरी, त्रिभुवन दत्त, सुखदेव राजभर जैसे बड़े नेता शामिल थे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी उससे पहले ही बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके थे। पहले 2022 और फिर 2024 में बसपा से सपा में आए नेताओं को मिली कामयाबी के बाद नसीमुद्दीन को भी एहसास हो गया था कि कांग्रेस में आकर उन्होंने गलती कर दी। लेकिन, उन्होंने इसका इजहार नहीं किया। उधर, नसीमुद्दीन के बेटे अफजल सिद्दीकी भी राजनीति में कदम रख चुके थे। जानिए नसीमुद्दीन के आने से सपा को फायदा या नुकसान वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- चुनाव में परसेप्शन अहम होता है। चुनाव परसेप्शन का खेल है, ये अखिलेश यादव भी जानते हैं। नसीमुद्दीन बतौर मंत्री 18 विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। बसपा में प्रबंधन और संगठन की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इसका जिक्र अखिलेश यादव ने भी अपने संबोधन में किया कि वे कई सरकारें संभाल चुके हैं। लंबा अनुभव है। नसीमुद्दीन ने भी अपने अंदाज में 15,718 का आंकड़ा देकर बता दिया कि कांग्रेस में होते हुए भी उनके साथ बड़ी संख्या में बसपा के लोग भी सपा के साथ आ गए हैं। निश्चित रूप से परसेप्शन की दृष्टि से अखिलेश यादव के लिए ये फायदे का सौदा होगा। हालांकि, नसीमुद्दीन ने खुद ये कहकर कि सपा में उनसे पहले कई बसपा के लोग आ चुके हैं, वे सब उनके सीनियर हैं, पार्टी में वे सबसे जूनियर हैं। इस विवाद को खत्म करने की कोशिश की है। नसीमुद्दीन सपा में आए, लेकिन अब भविष्य क्या वरिष्ठ पत्रकार और राजनीति के जानकार अशोक त्रिपाठी कहते हैं- नसीमुद्दीन के आने से सपा को कोई खास फायदा नहीं होगा। सिवाय यह गिनाने के कि एक बड़े कद के नेता ने पार्टी जॉइन की। लेकिन, नसीमुद्दीन को कई फायदे हैं। मसलन, वे अपनी पारी तो खेल चुके हैं। अब उनके सामने भी बेटों का भविष्य है। कांग्रेस में रहते हुए भी टिकट के लिए उन्हें पहले कांग्रेस से जद्दोजहद करनी पड़ती। कांग्रेस और सपा का समझौता जो अभी तक तय माना जा रहा, सीट छोड़ने के लिए सपा से भी मशक्कत करनी पड़ती। उसके बाद भी जीत मिलेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल था। जानकार बताते हैं, नसीमुद्दीन के साथ बड़ी संख्या में नेता सपा में शामिल हुए हैं। उनकी पत्नी और बेटा अफजल भी सपा में शामिल हुआ। नसीमुद्दीन बड़े कद के नेता हैं। माना जा रहा है, उन्हें जल्द ही पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी दे सकती है। बसपा में भी वे इसी पद पर रह चुके हैं। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश बोले- बहुजन समाज से पुराना रिश्ता...आगे भी काम करेंगे, नसीमुद्दीन को सपा जॉइन कराई पश्चिम यूपी में मुस्लिमों के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया है। रविवार को अखिलेश यादव उन्हें साथ लेकर लखनऊ में सपा कार्यालय पहुंचे। वहां पार्टी की सदस्यता दिलाई। नसीमुद्दीन के साथ 15,758 लोगों ने भी सपा जॉइन की। इसमें ज्यादातर बसपा कार्यकर्ता रहे हैं।