मर्जी से शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केस रद्द किया, कहा- दबाव में संबंध बना ये कहना गलत
2026-02-16 18:58:25 | Views: 0
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा- अगर महिला ने अपनी मर्जी से संबंध बनाए हैं, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने आरोपी नीरज और अन्य के खिलाफ दर्ज केस को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने कहा- रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि आरोपित ने पीड़िता की फोटो या वीडियो वायरल की। वॉट्सऐप चैट से यह भी सामने आया कि दोनों के बीच नियमित बातचीत थी। ब्लैकमेल का आरोप भी साबित नहीं होता। शिकायत में देरी पर सवाल कोर्ट ने कहा- अगर शादी का वादा शुरू से ही झूठा था, तो पीड़िता तुरंत शिकायत करती। लेकिन उसने एक साल तीन महीने बाद एफआईआर दर्ज कराई। इससे यह संकेत मिलता है कि संबंध आपसी सहमति से थे। पीड़िता ने पहले कहा कि उसने अपनी मर्जी से संबंध बनाए, बाद में कहा कि वह दबाव में थी। कोर्ट ने कहा कि एक विवाहित महिला लंबे समय तक किसी के साथ संबंध बनाए रखे और फिर दबाव की बात करे, यह समझना कठिन है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले प्रशांत बनाम दिल्ली राज्य का जिक्र किया। इसमें कहा गया है कि अगर दो लोग लंबे समय तक संबंध में रहें, तो यह मानना मुश्किल है कि एक पक्ष पूरी तरह दबाव में था। यह है पूरा मामला…. मामला बरेली के थाना इज्जतनगर में दर्ज हुआ था। एफआईआर 1 दिसंबर 2024 को दर्ज हुई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पीसीएस की तैयारी के दौरान उसकी दोस्त के भाई ने होटल में बुलाकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना ली। बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार संबंध बनाए। साथ ही, उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी के चचेरे भाई ने भी संबंध बनाने का दबाव डाला और मना करने पर वीडियो परिवार को भेज दी। आरोपित पक्ष ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत आवेदन देकर चार्जशीट और समन आदेश सहित पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में केस को खारिज कर दिया।