पीलीभीत में फर्जी धान खरीद का खेल:जांच से बचने को रातों-रात दिखा 'अदृश्य स्टॉक', जिम्मेदार अफसरों ने साधी चुप्पी
2026-02-17 06:18:07 | Views: 0
पीलीभीत की मंडी परिषद में धान खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। शासन की जांच शुरू होने की आशंका के बाद मंडी परिसर में रातों-रात वह धान दिखाई देने लगा है, जो अब तक केवल कागजों में दर्ज था। आरोप है कि भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए मंडी सचिव और निरीक्षकों के संरक्षण में राइस मिलों से सांठगांठ कर 'अदृश्य स्टॉक' को भौतिक रूप से मौजूद दिखाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी तक जिन मंडी क्रय केंद्रों पर धान का नामोनिशान नहीं था, वहां अब अचानक धान के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह वही धान है जिसे कागजों में पहले ही खरीदा हुआ दर्शाया गया था, लेकिन वास्तव में वह मौजूद नहीं था। शासन द्वारा कड़ी जांच शुरू किए जाने के बाद मंडी निरीक्षक डी.के. पटेल और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इस कार्रवाई से बचने के लिए राइस मिलों से धान मंगवाकर फर्जी खरीद को 'व्यवस्थित' करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी बताई जा रही हैं, जिसमें मंडी सचिव से लेकर जिले के उच्चाधिकारी (एडीएम) तक चुप्पी साधे हुए हैं। जब मंडी सचिव प्रवीण अवस्थी से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने अजीब तर्क देते हुए कहा कि “हो सकता है धान का स्टॉक चूहों से बचाने के लिए किसी सुरक्षित गोदाम में रखवा दिया गया हो।” राइस मिलों से धान आने के पुख्ता सबूतों पर सवाल पूछने पर वह गोलमोल जवाब देते नजर आए। मंडी समिति के गलियारों में चर्चा है कि फर्जी खरीद करने वाले निरीक्षक डी.के. पटेल को बचाने के लिए पूरा तंत्र सक्रिय है। बाहर से स्टॉक मंगवाकर मिलान किया जा रहा है ताकि जांच टीम के भौतिक सत्यापन के दौरान सब कुछ सामान्य लगे। यह सीधे तौर पर शासन को गुमराह करने और राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला है।