बिजनौर के महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सालय की केंद्रीय प्रयोगशाला के बायोकेमिस्ट्री विभाग में अत्याधुनिक Astira CX400 फुली ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर का शुभारंभ किया गया है। यह मशीन अब अस्पताल में 24 घंटे जांच सुविधा उपलब्ध कराएगी। मशीन का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. तुहिन वशिष्ठ ने किया। डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि यह नई मशीन अस्पताल की जांच सेवाओं को गति और सटीकता प्रदान करेगी। Astira CX400 की क्षमता प्रति घंटा 400 टेस्ट करने की है। इससे मरीजों की जांच रिपोर्ट पहले से कहीं अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकेगी। बायोकेमिस्ट्री विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने इसे विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इनमें प्रोफेसर डॉ. सूर्यकांत नागटिलक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेखा चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरुण नागिलक और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पियूष कुमार सिंह शामिल हैं। केंद्रीय प्रयोगशाला के डॉ. इंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह स्वचालित एनालाइजर क्लीनिकल लैब में कई महत्वपूर्ण जांचों के लिए उपयोग होगा। इसमें ग्लूकोज, SGOT, SGPT, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन (डायरेक्ट और टोटल), यूरिया, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, ALP, एल्ब्यूमिन, HDL, LDL, टोटल प्रोटीन, कैल्शियम और CRP जैसे बायोकेमिस्ट्री परीक्षण शामिल हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, इस मशीन से जांच की गति, सटीकता और परिणामों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सालय की केंद्रीय प्रयोगशाला में पहले से ही 24 घंटे जांच सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, बायोकेमिस्ट्री विभाग वर्तमान में पी.जी. सीट के लिए आवेदन प्रक्रिया में है। डॉ. सूर्यकांत नागटिलक ने बताया कि यह अत्याधुनिक मशीन शोध कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी होगी। यह पी.जी. पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को उन्नत तकनीक पर प्रशिक्षण और अनुसंधान का अवसर भी प्रदान करेगी। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील मलिक, डॉ. रूपा, डॉ. पूजा, डॉ. कृति, डॉ. नीलम, डॉ. आलोक त्रिपाठी, डॉ. अनीश प्रभाकर, डॉ. दिनेश गोस्वामी, डॉ. विदित, डॉ. अमरदीप, डॉ. अजय प्रजापति सहित अन्य चिकित्सक, तकनीकी स्टाफ और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इस दौरान सभी ने इसे संस्थान की गुणवत्ता उन्नयन एवं शैक्षणिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह नई सुविधा निश्चित रूप से मरीजों को बेहतर, तेज और सटीक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा एवं शोध को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।