मनरेगा बहाली को लेकर कांग्रेस का धरना:हाउस अरेस्ट के बीच आवास पर प्रदर्शन, सीओ सिटी को सौंपा ज्ञापन
2026-02-17 10:18:55 | Views: 0
मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ ने अपने आवास पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर यह विरोध 17 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। विधानसभा लखनऊ घेराव से एक दिन पहले पुलिस ने गोपाल कुलश्रेष्ठ, पीसीसी सदस्य अनुपम शाक्य और जिला कोषाध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा को हाउस अरेस्ट कर लिया था। धरने के दौरान राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन सीओ सिटी संतोष कुमार को सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि 20 वर्ष पूर्व लागू किया गया महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण भारत में काम के अधिकार को मजबूत करने वाला कानून है। कोविड-19 जैसे संकट के समय यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा साबित हुआ था।
जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मनरेगा में बदलाव कर इसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीबों, किसानों और मजदूरों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तब तक आंदोलन जारी रखेगी जब तक मनरेगा को पूरी तरह उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता। कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। गोपाल कुलश्रेष्ठ ने यह भी कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन पार्टी मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। इस अवसर पर पीसीसी सदस्य एडवोकेट अरविंद यादव ने कहा कि काम करने का अधिकार छीना जा रहा है। अनुपम शाक्य ने मनरेगा को किसानों और मजदूरों के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा बताया। डॉ. नवीन शर्मा ने मांग की कि मनरेगा में किए गए बदलाव तत्काल वापस लिए जाएं और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए। धरना कार्यक्रम में भीमसेन कठेरिया, शरद पचौरी, सरफराज अहमद सिद्दीकी, नकुल शाक्य, मोनू यादव, अमित वर्मा, वाजिफ अली, शेखर यादव, एडवोकेट राकेश कुमार, ज्ञान कुमार, शैलू सक्सेना, कन्हैया कुमार, रवि यादव, पप्पू यादव और दुर्गा सहाय सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।