​अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की मांग उठा रहे छात्र नेता सोनपाल सिंह और उनके साथी पर कैंपस परिसर में ही हमला कर दिया। विश्वविद्यालय के पॉलिटेक्निक ऑडिटोरियम में मेंटल हेल्थ पर कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एसएसपी नीरज कुमार जादौन के आने से पहले हुई घटना से हड़कंप मच गया। इस मामले में मंगलवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचकर छात्रों ने शिकायत देकर जान का खतरा बताया है। ​ऑडिटोरियम से बाहर निकाल कर पीटा छात्र नेता सोनपाल सिंह ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां मौजूद जम्मू-कश्मीर के छात्र अजहर, मंजूर, सकलेन और उनके साथियों ने उन्हें गाली-गलौज करते हुए ऑडिटोरियम से बाहर निकाल दिया। इसके बाद सोनपाल और उसके साथी को बुरी तरह से पीटा गया। इसके बाद धमकी दी कि अगर दोबारा किसी प्रोग्राम में दिखे तो जान से मार देंगे। आवाज दबाने के लिए रची गई साजिश ​सोनपाल सिंह ने इस हमले को एक सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि ​लगातार AMU छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे हैं। उन्होंने एएमयू प्रशासन पर आवाज दबाने की नीयत से हमला करवाने का आरोप लगाया है। हमलावरों का कहना था कि वह लोग कार्यक्रम को खराब करने के इरादे से आए हैं। वहीं, सोनपाल और उनके दोस्त का कहना था कि वह सिर्फ मेंटल हेल्थ पर सवाल पूछना चाहते थे। प्रवेश पत्र की मांग कर रहे छात्रों से गाली–गलौज सोनपाल ने प्रॉक्टोरियल टीम पर 12वीं के छात्रों के साथ अभद्रता और गाली–गलौज करने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि 12वीं कक्षा के कुछ छात्र अपनी इम्प्रूवमेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड लेने कंट्रोलर ऑफिस गए थे। वहां मौजूद प्रॉक्टोरियल टीम के सुरक्षा अधिकारी ने छात्रों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की। इस घटना के दो वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिसमें सुरक्षाकर्मी छात्रों को गालियां देते हुए सुनाई दे रहे हैं। छात्रों का आपसी विवाद था इस संबंध में एएमयू प्रॉक्टर प्रोफेसर नवेद खान ने बताया कि यह छात्रों का आपसी विवाद था। एएमयू प्रशासन पर वह गलत आरोप लगा रहे हैं। सोनपाल काफी दिनों से धरने पर थे, एएमयू प्रशासन ने कभी उनके साथ अभद्रता नहीं की है। कैंपस में किसी की सुरक्षा से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं होगा। इस मामले की भी जांच कराई जा रही है। नहीं की गई गाली–गलौज प्रॉक्टर ने कहा कि 12वीं के छात्र इंप्रूवमेंट की परीक्षा देने की मांग कर रहे थे। करीब दो साल पहले के सत्र की परीक्षा देना चाह रहे थे। उन छात्रों को कंट्रोलर के पास भी भेजा गया था। जहां उनको बताया गया कि सालों पहले के सत्र की पुन: परीक्षा संभव नहीं है। किसी भी कर्मचारी ने कोई अभद्रता नहीं की है। छात्रों के आक्रोशित होने पर केवल कर्मचारी ने यह कहा था कि उनके बच्चे भी यहीं पढ़े हैं और यूनियन में भी रहे हैं।