बस्ती में बहुजन एकता मंच ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026 के समर्थन में राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। मंच ने मांग की है कि इन नियमों को किसी भी परिस्थिति में वापस न लिया जाए और इन्हें देश के सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) सहित प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि ये विनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17, 21 और 46 में निहित समानता, गरिमा तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। मंच ने आरोप लगाया कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिलाओं और दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, शैक्षणिक बहिष्कार और सामाजिक अपमान की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। मंच ने ज्ञापन में 2019 से 2024 के बीच जाति-आधारित भेदभाव के मामलों में वृद्धि का उल्लेख किया है, जिसमें बड़ी संख्या में औपचारिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी की आत्महत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए, मंच ने इसे संस्थागत असंवेदनशीलता और जातिगत भेदभाव का परिणाम बताया। मंच ने अपनी मांगों में प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में समता समिति के गठन, शिकायतों के लिए चौबीसों घंटे राष्ट्रीय सहायता क्रमांक जारी करने, सभी IIT और IIM में नियमों को लागू करने, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण अनुपात के अनुसार कुलपति नियुक्त करने और लंबित आरक्षित पदों को शीघ्र भरने की बात कही है। ज्ञापन सौंपने वालों में विनय चौधरी, चौधरी बृजेश पटेल, कमलेश जैचन, अजीत, सत्य चौधरी, अजय कुल्शा और अभिषेक पटेल सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।
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