हरदोई के डॉ. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय, अल्लीपुर में 'भारतीय साहित्य में राम तत्व' विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद और समाज-चिंतक शामिल हुए, जिन्होंने राम के आदर्शों और साहित्य में उनकी सर्वव्यापकता पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ 'श्री राम दरबार' की आरती और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी का एक प्रमुख आकर्षण छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई सजीव झांकी थी। बच्चों ने 'निषादराज मिलन', 'केवट प्रसंग' और 'भरत मिलाप' जैसे प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का चित्रण किया। मुख्य अतिथि, तुलसी साहित्य के विशेषज्ञ प्रो. सूर्य प्रकाश दीक्षित ने कहा कि राम केवल धार्मिक महापुरुष नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य की चेतना और समन्वय के प्रतीक हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. देवी प्रसाद तिवारी (BHU) ने रामकथा को भारत की सांस्कृतिक एकता का सूत्र बताया। मुख्य वक्ता श्री ज्ञान पांडेय ने चरित्र निर्माण में राम तत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला। अंतरराष्ट्रीय रामायण संस्थान के निदेशक और आयोजन के सूत्रधार श्री जैनेन्द्र कुमार (IAS) ने इस विमर्श को ग्रामीण अंचल तक पहुँचाने में भूमिका निभाई। महाविद्यालय के संस्थापक डॉ. सुशील चन्द्र त्रिवेदी 'मधुपेश' की प्रतिनिधि स्नेहिल पाण्डैय ने शिक्षण संस्थानों में नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बी.एस. पांडेय ने की और संचालन राजकुमार सिंह ने किया। महेश मिश्र ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. ईश्वर चंद्र वर्मा, मदन मोहन पाण्डेय, और डॉ. शशिकांत पांडेय सहित कई शोधार्थी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। देखें तस्वीरें…
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