बांदा मंडल कारागार से स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना की रिहाई के मामले में विशेष कार्यबल (SOG) टीम ने एक बार फिर जांच की है। टीम ने जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और माफिया से मुलाकात करने वालों के नाम भी देखे। एसओजी टीम ने वर्तमान जेल अधीक्षक और जेल वार्डनों से माफिया के संबंध में पूछताछ की। मुलाकातियों के नाम एक डायरी में नोट किए गए हैं। यह सुरागरसी करीब एक घंटे तक जेल में चलती रही। दादूपुर, दनकौर, ग्रेटर नोएडा निवासी स्क्रैप माफिया और कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना को गौतमबुद्ध नगर की जेल से अगस्त 2024 में बांदा की मंडल कारागार में स्थानांतरित किया गया था। उसे यहां की जेल से 29 जनवरी की शाम 6:39 बजे रिहा कर दिया गया था। इस रिहाई पर गौतमबुद्ध नगर की सीजेएम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने तत्कालीन जेल अधीक्षक अनिल सिंह गौतम से स्पष्टीकरण तलब करते हुए पूछा था कि जब आरोपी पर रंगदारी मांगने का मुकदमा विचाराधीन था, तो उसकी रिहाई कैसे कर दी गई। डीजी कारागार लखनऊ ने पहले जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित किया था। बाद में तत्कालीन जेल अधीक्षक अनिल सिंह गौतम और डिप्टी जेलर निर्भय को भी बुधवार शाम निलंबित कर दिया गया। डीजी कारागार लखनऊ पीसी मीणा के निर्देश पर डीआईजी जेल प्रयागराज जोन राजेश श्रीवास्तव ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में माफिया की रिहाई के मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलर की मिलीभगत होने की बात कही गई है। उधर, एसपी पलाश बंसल के निर्देश पर एएसपी शिवराज के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय विशेष टीम भी माफिया की रिहाई मामले की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, यह टीम माफिया की जेल से रिहाई के समय होटलों में ठहरने वालों का सत्यापन कर रही है। विशेष रूप से इस बात की जांच की जा रही है कि माफिया का कोई सगा संबंधी तो होटलों में नहीं ठहरा था। इसके अलावा, एसओजी द्वारा जेल में माफिया से मुलाकात करने वाले जिन लोगों के नाम नोट किए गए हैं, उनमें माफिया की पत्नी मधु और महिला मित्र काजल आदि शामिल हैं।