भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में चल रहे राष्ट्रीय रामायण मेला में सोमवार शाम बनारस की भजन गायिका आराधना सिंह ने अपनी प्रस्तुति दी। उनके मधुर भजनों से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा पंडाल देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। आराधना सिंह ने बताया कि चित्रकूट में यह उनकी पहली प्रस्तुति थी और उन्हें यहां आकर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि वह भगवान राम, श्रीकृष्ण और शिव के भजन गाती हैं और चित्रकूट की पावन धरती पर गाने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने हर वर्ष राष्ट्रीय रामायण मेला में प्रस्तुति देने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने भगवान राम के जन्म प्रसंग पर आधारित भजन "जन्मे हैं चारों भाई, घर-घर बाजे बधाई" प्रस्तुत किया। इस भजन पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति रस घुल गया। इसी क्रम में, रामायण और मानस पर शोध करने वाले विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए। सुल्तानपुर से पवन कुमार सिंह, अम्बेडकर नगर से ओम अनादि गुप्त, उत्तराखंड से डॉ. मूलचंद्र शुक्ल और सुल्तानपुर से डॉ. रामप्यारे ने शोधपरक व्याख्यान दिए। वक्ताओं ने रामकथा की प्रासंगिकता और भारतीय संस्कृति में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने किया। राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी, प्रचार मंत्री राजाबाबू पांडेय सहित प्रद्युम्न कुमार दुबे, मनोज मोहन गर्ग, सतेन्द्र पांडेय, ज्ञानचंद्र गुप्ता, मो. यूसुफ, मो. इम्तियाज, राजेंद्र मोहन त्रिपाठी, विनोद पांडेय, दद्दू महाराज, कलीमुद्दीन बेग, नत्थू प्रसाद सोनकर और विकास जैसे अन्य पदाधिकारियों ने विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग किया। राष्ट्रीय रामायण मेला में प्रतिदिन भक्ति, शोध और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।