बरेली के मोहम्मदगंज में नमाज पर हाईकोर्ट का एक्शन:हाई कोर्ट ने डीएम-एसएसपी को थमाया अवमानना का नोटिस, निजी घर में नमाज रोकने पर भड़की अदालत
2026-02-17 09:30:22 | Views: 0
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली के जिला अधिकारी (DM) अविनाश सिंह और एसएसपी (SSP) अनुराग आर्य को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मामला बरेली के मोहम्मदगंज गांव का है, जहां एक निजी घर में सामूहिक नमाज रोकने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट सख्त: निजी घर में प्रार्थना के लिए इजाजत की जरूरत नहीं जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने साफ कहा कि किसी के निजी परिसर में धार्मिक गतिविधि को रोकना कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। अदालत ने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जैसे ईसाई समुदाय को घरों में प्रार्थना के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं है, वैसे ही यह नियम नमाज पर भी लागू होता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। ग्राउंड रिपोर्ट: हिंदू परिवारों ने दी पलायन की चेतावनी हाई कोर्ट में भले ही राहत मिली हो, लेकिन मोहम्मदगंज गांव (विसारतगंज) के हालात तनावपूर्ण हैं। गांव की हिंदू आबादी ने घरों के बाहर 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर लगा दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पहले कभी सामूहिक नमाज नहीं होती थी, अब नई परंपरा डाली जा रही है। महिलाओं का कहना है कि नमाज के बहाने भीड़ जुटती है और विरोध करने पर उनके घरों पर पत्थर फेंके जाते हैं और गाली-गलौज की जाती है। समीकरण: बिना मंदिर-मस्जिद वाले गांव में 'अवैध मदरसे' का विवाद करीब 1200 की आबादी वाले इस गांव में 65% हिंदू और 35% मुस्लिम रहते हैं। गांव में कोई भी पंजीकृत धार्मिक स्थल नहीं है। हिंदू पक्ष का दावा है कि एक खाली घर को 'अवैध मदरसा' बनाकर वहां मस्जिद की नींव डालने की कोशिश हो रही है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि गांव में मस्जिद न होने के कारण वे जुमे की नमाज एक खाली घर में पढ़ते हैं, जो उनकी मजबूरी है। जांच के लिए बनी संयुक्त टीम विवाद बढ़ने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता भी गांव पहुंच गए हैं, जिससे माहौल और गरमा गया है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि एसडीएम और सीओ की एक संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि गांव में शांति है और पलायन जैसी खबरों को केवल दबाव बनाने का तरीका बताया जा रहा है। फिलहाल, 11 मार्च को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।