मोहम्मद दीपक (जिनका असली नाम **दीपक कुमार कश्यप** है) उत्तराखंड के कोटद्वार में हाल ही में बहुत वायरल हुए हैं। ये एक जिम ट्रेनर/ओनर हैं और उन्होंने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार (मोहम्मद शोएब की "बाबा ड्रेस" दुकान) का साथ दिया था।
क्या हुआ था?
-बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम में "बाबा" शब्द पर आपत्ति जताई और नाम बदलने की मांग की (कहा कि ये सिर्फ हिंदुओं का नाम है)।
दीपक कुमार वहां पहुंचे, विरोध किया और बहस में जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा: **"मेरा नाम मोहम्मद दीपक है"**।
उनका मकसद था दिखाना कि इंसान की पहचान धर्म से नहीं होनी चाहिए, और वो हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देना चाहते थे।
वीडियो वायरल हो गया, और उन्हें सोशल मीडिया पर खूब तारीफ मिली। **राहुल गांधी** ने उन्हें "भारत का हीरो" कहा, असदुद्दीन ओवैसी ने भी सलाम किया।
लेटेस्ट अपडेट (फरवरी 2026 तक)
बजरंग दल ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया (शनिवार शाम को), घर पर भीड़ पहुंची, धमकियां मिलीं।
दीपक ने आरोप लगाया कि उन्हें और परिवार को अपशब्द कहे गए, जान की धमकी मिली।
पुलिस ने मामले में **FIR** दर्ज की है – जिसमें मोहम्मद दीपक समेत कई लोगों के खिलाफ केस है (तनाव फैलाने के आरोप में), साथ ही धमकी देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।
दीपक ने कहा: "न मैं हिंदू हूं, न मुसलमान... इंसानियत सबसे ऊपर है।" उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक कहकर धर्म से ऊपर उठने का मैसेज दिया।
ये घटना कोटद्वार में 26 जनवरी के आसपास शुरू हुई और अब पूरे देश में चर्चा में है – एक तरफ इंसानियत की मिसाल, दूसरी तरफ तनाव और राजनीति।
दीपक कुमार कश्यप (जिन्हें अब सोशल मीडिया पर **मोहम्मद दीपक** कहा जाता है) ने अपना नाम के आगे **"मोहम्मद"** इसलिए लगाया, क्योंकि वो एक प्रतीकात्मक (symbolic) बयान देना चाहते थे।
✓असली वजह क्या थी?
✓26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में बजरंग दल के कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार (मोहम्मद शोएब या अहमद वकील) की दुकान "बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर" के नाम से **'बाबा'** शब्द हटाने की मांग की। उनका तर्क था कि 'बाबा' सिर्फ हिंदुओं का शब्द है।
- दीपक वहां पहुंचे, दुकानदार का साथ दिया और बहस में जब उनसे नाम पूछा गया, तो उन्होंने कहा: **"मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।"**
✓ बाद में कई इंटरव्यू और स्टेटमेंट्स (जैसे BBC, Hindustan Times, The Indian Express आदि में) दीपक ने खुद स्पष्ट किया:
ये नाम उन्होंने इसलिए इस्तेमाल किया ताकि दिखा सकें कि **इंसान की पहचान धर्म से तय नहीं होनी चाहिए**।
- वो हिंदू-मुस्लिम एकता का मैसेज देना चाहते थे – जैसे "मैं हिंदू हूं, लेकिन मुस्लिम भाई के साथ खड़ा हूं, तो नाम में क्या फर्क पड़ता है?"
- उनका कहना है: **"मैं न हिंदू हूं, न मुसलमान... सबसे पहले इंसान हूं। मरने के बाद भगवान और इंसानियत को जवाब देना है, किसी धर्म को नहीं।"**
- ये एक तरह का **चैलेंज** था उन लोगों को, जो नाम या शब्दों पर धर्म आधारित नियम थोप रहे थे। जैसे – अगर मुस्लिम 'बाबा' इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो हिंदू 'मोहम्मद' क्यों नहीं?
ये कोई स्थायी नाम बदलना नहीं था, बल्कि घटना के दौरान दिया गया बयान था, जो वीडियो में वायरल हो गया। इससे वो देशभर में **इंसानियत की मिसाल** बन गए – राहुल गांधी ने उन्हें "भारत का हीरो" कहा, लेकिन कुछ गुटों ने विरोध भी किया और पुलिस ने उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की (शांति भंग के आरोप में)।
संक्षेप में: **"मोहम्मद" लगाना एक प्रतीक था – धर्म से ऊपर इंसानियत और बराबरी का संदेश देने के लिए।** अगर और कोई डिटेल या इंटरव्यू क्लिप चाहिए तो बताना! 🇮🇳