पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बुधवार को बारिश के बाद मौसम ठंडा हो गया है। आज गुरुवार सुबह हल्की ठंडी हवा से गलन महसूस हो रही है। गुरुवार के लिए मौसम विभाग ने ग्रीन अलर्ट जारी किया है, यानी मौसम साफ रहेगा। बारिश से तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आई। हालांकि पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में इस बदलाव का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। बुधवार की बात करें तो बांदा 8.2°C के साथ सबसे ठंडा रहा। मथुरा में शाम बारिश हुई। दोपहर में यहां तेज धूप थी। नोएडा और बुलंदशहर में दोपहर में तेज बारिश हुई थी। मेरठ और बरेली में बादल छाए रहे। संभल, गाजियाबाद और अमरोहा में तेज ठंडी हवा चली। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया- मध्य पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब क्षेत्र के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण चक्रवाती परिसंचरण बना। इसी के प्रभाव से पश्चिमी यूपी के कई जिलों में हल्की बारिश और तेज हवा चली। बुधवार की तस्वीरें देखिए- पछुआ हवा से पारा 3 डिग्री तक गिरेगा मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब मौसम साफ होने की संभावना है। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना नहीं है। पछुआ हवा के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जबकि अधिकतम तापमान में विशेष बदलाव की उम्मीद नहीं है। तापमान जानिए- गेहूं-सरसों की फसल गिरी तो पैदावार कम होगी विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि तेज हवा के साथ बारिश होती है तो गेहूं और सरसों की फसल गिर सकती है, जिससे दाने कमजोर हो सकते हैं और पैदावार पर असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने कटी हुई फसलों को खुले में न रखने और सुरक्षित जगह पर भंडारण करने की सलाह दी है। अब तक कैसा रहा मौसम नोएडा स्थित स्काईमेट वेदर के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत बताते हैं- यूपी में 2 साल के मुकाबले इस बार कम ठंड रही। दिसंबर-जनवरी में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहे। 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच 36 फीसदी की कमी देखी गई। इस बार एक्सट्रीम ठंड देखने को नहीं मिली। ला-नीना एक्टिव न होने की वजह से ठंड ज्यादा नहीं पड़ सकी। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश भी यही बताते हैं कि इस बार प्रदेश में सर्दियों के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की सक्रियता भी कम रही। इससे ठंड के सीजन में बारिश भी सामान्य से कम हुई। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव बताते हैं- अब ठंड अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। अभी वसंत का मौसम चल रहा है। अगले 2-3 हफ्तों तक मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान सुबह और रात में हल्की ठंड रहेगी, जबकि दोपहर में धूप थोड़ी तेज महसूस होगी। वेदर एक्सपर्ट महेश पलावत के अनुसार, 18 फरवरी के आसपास यूपी के कई जिलों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। इसमें हाथरस, मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, ललितपुर और झांसी जैसे इलाके शामिल हैं। अब पढ़िए कब से भीषण गर्मी पड़ेगी और कितना पहुंचेगा पारा 1- मार्च के पहले हफ्ते से गर्मी की शुरुआत बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव कहते हैं- मार्च के पहले हफ्ते से मौसम पूरी तरह बदलने लगेगा और गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा। दिन और रात, दोनों के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। मार्च के आखिरी हफ्ते तक यूपी के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 2- मई-जून में 42 से 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा मनोज श्रीवास्तव कहते हैं- अप्रैल में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मई-जून में कई जिलों में अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि केवल दिन ही नहीं, रात के समय भी गर्मी से राहत कम मिलेगी और उमस बनी रहेगी। हालांकि, यह काफी हद तक अल नीनो की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर अल नीनो की स्थिति बनी रहती है या मजबूत होती है, तो गर्मी की हालत और ज्यादा गंभीर हो सकती है। 3- हीट वेव ज्यादा दिनों तक चलेगी यूपी समेत देशभर में मार्च से मई के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। इसमें सिर्फ मार्च महीने में पूरे देश में अधिकतम और न्यूनतम, दोनों तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। साथ ही, हीट वेव के दिनों की संख्या भी सामान्य से ज्यादा रहेगी। सिर्फ पूर्वोत्तर भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में आने वाले महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हीट वेव के दिन सामान्य रहेंगे। 4- गर्मी से फसलों को होगा नुकसान बीएचयू के कृषि विभाग के प्रोफेसर पीके सिंह कहते हैं- मार्च महीना किसानों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। तापमान बढ़ने का असर रबी की फसल पर पड़ेगा। खासतौर गेहूं पर। गर्मी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं होंगे। इससे पैदावार कम होगी।। पीके सिंह के अनुसार, गर्म हवाएं चलने से सरसों, चना और मटर जैसी फसल को भी नुकसान हो सकता है। बढ़ते तापमान से खेतों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। इससे सिंचाई का खर्च बढ़ता है। फसलों पर तनाव पड़ता है। 5- समय से पहले बढ़ती गर्मी, हालात और बिगड़ेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ध्रुवसेन सिंह के अनुसार, साल 2026 में समय से पहले गर्मी बढ़ गई है। हीट वेव की घटनाएं ज्यादा बार और लंबे समय तक हो सकती हैं। शहरी इलाकों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं। ये सभी कारण मिलकर तापमान को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं। ---------------------------